पानीपत की लड़ाइयाँ एक ही जगह क्यों हुई?
इतिहास

पानीपत की लड़ाइयाँ एक ही जगह क्यों हुई?

पानीपत की लड़ाइयाँ

इतिहास पढ़ते हुए हमें पानीपत में हुए तीन महत्वपूर्ण युद्धों से परिचित होना पड़ता है, इन्हें पढ़ते हुए हमारे मन में यह प्रश्न जरूर कौंधता है कि अलग-अलग समय में हुई पानीपत की लड़ाइयाँ भी पानीपत के एक ही मैदान पर क्यों हुई? इसी प्रश्न का उत्तर लेकर आये हैं हम-

पानीपत में तीन ऐतिहासिक लड़ाइयाँ हुईं –

  • पहली लड़ाई – 21 अप्रैल 1526 (बाबर एवं इब्राहिम लोदी) [पानीपत का प्रथम युद्ध]
पानीपत की लड़ाइयाँ
Image Source : WikiPedia
  • दूसरी लड़ाई – 5 नवंबर 1556 बैरम ख़ाँ(अकबर का सेनापति) एवं हेमू(आदिलशाह सूर का सेनापति ) [पानीपत का द्वितीय युद्ध]
पानीपत की लड़ाइयाँ
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  • तीसरी लड़ाई – 1761 (मराठा सेना एवं अहमदशाह अब्दाली) [पानीपत का तृतीय युद्ध]
पानीपत की लड़ाइयाँ

हम बात कर रहे है कि पानीपत की लड़ाइयाँ एक ही जगह क्यों हुई?

तो इस बारे में हमें इतिहास के स्रोतों में अधिक तथ्य नहीं मिलते हैं, पर भौगोलिक ढाँचे के आधार पर तथ्य हम स्वयं बना सकते हैं.

सिर्फ इतनी ही जानकारी है कि यहाँ युद्ध लड़े गए, इसके 2 कारण मुख्य हो सकते हैं।

पानीपत की लड़ाइयाँ
हरियाणा की सरकारी वेबसाइट से साभार नक्शा
  • पानीपत का विशाल समतल क्षेत्र – पानीपत क्षेत्र एकदम बीहड़ क्षेत्र है,लंबे चौड़े क्षेत्र में यह बिलकुल समतल सा है और युद्ध जैसी भीषण, भीमकाय घटना के लिए इस प्रकार की जगह का होना आवश्यक है।

  • अफ़ग़ानिस्तान, उज़्बेकिस्तान जैसे राष्ट्रों से आने वाले लड़ाकों का पानीपत के मैदान पर ही लड़ाई लड़ना। (हो सकता है कि ये अनुमान गलत हो जाएं परंतु इतिहास के उन इस्लामी लड़ाकों को देखें तो पानीपत के प्रत्येक युद्ध में भारत के उत्तरी- पश्चिमी हिस्से से ही आये हैं (जैसे बाबर का उज़्बेकिस्तान से आना, अहमदशाह अब्दाली का अफ़ग़ानिस्तान से आना, और दिल्ली के आखिरी हिन्दू बादशाह विक्रमादित्य हेमू का स्वयं पानीपत के पास रेवाड़ी से होना) यह एक मूल कारण हो सकता है कि पानीपत की ख्याति ने इन तीनों युद्धों को होने में आसानी कर दी।

पानीपत की लड़ाइयाँ

इतिहासकारों ने सिर्फ पानीपत नाम को तीन महत्वपूर्ण पानीपत की लड़ाइयाँ नाम दिया। यदि आप वर्तमान हरियाणा में पानीपत के आसपास 100 किलोमीटर के सामान्य क्षेत्र में लड़ी गई लड़ाइयों की संख्या की गिनती करते हैं, तो संख्या बहुत अधिक है।

पानीपत की लड़ाइयाँ

उस कसौटी पर, पानीपत की लड़ाइयाँ ही नहीं बल्कि कई महत्वपूर्ण लड़ाइयाँ इसमें आएँगी:

कुरुक्षेत्र की लड़ाई
थानेसर पर महमूद गजनी का हमला।
तराइन में मोहम्मद गोरी के खिलाफ पृथ्वीराज चौहान की दो लड़ाइयाँ
दिल्ली पर तैमूर का हमला।

लड़ने वाले आक्रमणकारी हमेशा उत्तर / उत्तर-पश्चिम से आते थे।
सभी दिल्ली चाहते थे, क्योंकि यह दुनिया के दो सबसे अधिक कृषि उत्पादक क्षेत्रों के बीच में है- सिंधु और गंगा के मैदान। जो भी दिल्ली को नियंत्रित करता है, वह उत्तर भारत को नियंत्रित करता है।

यही कारण था कि काबुल, या पुणे में स्थित दूर-दराज के राज्यों ने भी विशाल सेनाओं को दिल्ली भेजना उचित समझा।

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