लावणी : थार के रंग
थार के रंग 

लावणी : थार के रंग (2) : Kanha Sharma

लावणी



फसल के पक जाने के बाद उसे खेत से काटकर (reap) दाने को बोरी में पहुंचाने तक की सम्पूर्ण प्रकिया थळी क्षेत्र में लावणी है। महाराजा गंगासिंह जी की भागीरथी पहल, इंजीनियर श्री कंवरसेन की कल्पना के चलते आई गंग नहर (वर्तमान में बड़ा भाग इंदिरा गांधी नहर / कंवरसेन लिफ्ट) और पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के दूरदर्शी एवं विकासवादी रवैये तथा अथक प्रयासों के चलते रेत के कबीले आजकल चक और ढाणियों में जमींदार की हैसियत से आबाद है।

लावणी : थार के रंग

लावणी में खेचळ (Endeavour) और endurance (बुथो) अत्यावश्यक योग्यता है। थोड़े समय पहले धानी रंग बिखेरकर झूमती फसल का देखते ही देखते स्वर्णिम परिदृश्य में तब्दील हो जाना कृषक को कमर कस लेने का संकेत है। तमाम  गांयितरे (यात्राएं), परियोजनाएं, कार्यक्रम, मेहमानी – मेजबानी आदि लावणी समाप्त होने तक मुल्तवी (Postpone) हो जाते हैं। आइए लावणी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण टर्म्स पर चर्चा करते हैं।

हाथ लगाना:- दांती(scythe) की धार तेज करवाकर, रस्सियों की व्यवस्था करके लावणी की शुरुआत बाकायदा मुहूर्त और शुभ घड़ी को ध्यान में रखकर की जाती है जिसे हम हाथ लगाना कहते हैं। हाथ लगाने का कार्य वही सदस्य करता है, जिसकी राशि और सितारे सुव्यवस्थित चल रहे हों। कटाई श्यावङ (अन्न धन्न की देवी) को घर में रखने हेतु बाहर से भीतर की जाती है।

लावणी : थार के रंग

पांथ:- कटाई में सबसे मजबूत और दक्ष सदस्य अपने पास उपलब्ध टीम की संख्या के अनुसार एकबार में काटकर आगे बढ़ने के लिए एक कॉलम बनाता है, इसे पांथ औऱ उसे मैनेज करने वाले को पांथड़ियो कहते हैं। पांथड़ियो पांथ में काम कर रही टीम का कप्तान होता है, और वह हर हाल में हरवक्त सबसे आगे होता है। पांथड़ियो द्वारा decide की गई पांथ पर किसी तरह का विवाद अपेक्षित नहीं होता।

लावणी : थार के रंग

थब्बा/जेट/भारिया/गळेटिया/पूंजळी/मण्डळी:- ये फसल को काटकर इकठ्ठा करने की क्रमशः आरोही क्रम की वर्गीकृत शब्दावली है। थब्बा फसल को काटकर अपने पास रखे छोटे ढेर है, जिन्हें अगर ग्वार या घास है तो जेट, गेहूं या जौ है तो भारिया, मूंगफली है तो गळेटिया, बाजरा है तो पूंजळी और चना है तो मण्डळी कहलाती है और खळो जेट, भारिया, गळेटिया, पूंजळी, मण्डळी आदि का cumulative रूप है।

पीछ/तिस:- एक अवधि तक लगातार कटाई करके लिया जाने वाला interval है जिसमें सब एक जगह बैठकर जलपान ग्रहण करने के बहाने थोड़ी देर सुस्ता लेते हैं। पीछ के खत्म होते ही क्रमशः सबसे पहले आवश्यक रूप से महिलाएं, बच्चे (जिनको जवान हो जाने की दुहाई देकर जबरदस्ती उठा दिया जाता है), जवान और आखिरकार सबसे उम्रदराज व्यक्ति उठकर पांथ की और रवाना होता है।

पांथ को पूरा किए बिना बीच में जलपान ग्रहण कर लेना वर्जित है। ऐसा करने वाला कृषक  बिरादरी में अपनी प्रतिष्ठा खो देता है। यूनिट के मनोबल को कायम रखने हेतु थक जाने की स्थिति में भी उम्रदराज व्यक्ति यूनिट के सामने इस बात का उद्घाटन नही करते बल्कि बीड़ी या चिलम के बहाने सुस्ता लेते हैं। कुछ निकम्मे युवा कामचोरी के इरादे से शौच का बहाना बनाकर लोटा लेकर झाड़ियों में घण्टेभर के लिए निकल जाते हैं। राह चलते राहगीर को दूर से आते देखते ही पीछ वापिस काम पर लग जाती है, क्योंकि पकी हुई फसल के बीच बैठकर सुस्ताना कृषक प्रतिष्ठा पर ठेस होती है।

भातो:- यह कठिन परिश्रम कर रही यूनिट के खातिर दोपहर के भोजन की व्यवस्था है। जो काम खोटी होने से बचने हेतु उन्हें खेत की पांथ में ही उपलब्ध करवा दी जाती है। इसका विस्तृत विवरण अगली पोस्ट में दिया जाएगा।

दांती(Scythe) मीठी करना:- यह फसल काटने का समापन समारोह होता है। इस दिन सब खुश नजर आते हैं। युवा और बच्चे इसलिए खुश हैं क्योंकि कठोर मेहनत कर कटाई का समय पूरा हुआ और जिम्मेदार लोगों के चेहरों से शिकन इसलिए चली जाती है, क्योंकि आंधी-तूफान या बारिश जैसे खतरों के बीच फसल आखिरकार काटकर इकठ्ठा कर ली गयी है। सारी फसल कट जाने के उपलक्ष्य में हलवा, खीर, पूरी आदि बनाया जाता है तथा यूनिट को शाही भोज दिया जाता है।


(प्रकाशित आलेख में व्यक्त विचार, राय लेखक के निजी हैं। लेखक के विचारों, राय से hemmano.com का कोई सम्बन्ध नहीं है। कोई भी व्याकरण संबंधी त्रुटियां या चूक लेखक की है, hemmano.com इसके लिए किसी तरह से भी जिम्मेदार नहीं है।)

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कान्हा शर्मा

रेत के समंदर में पले-बढ़े कान्हा शर्मा खुद को ‘थारिस्ट’ कहते हैं। थार के रीति-रिवाजों, परंपराओं का बारीक विश्लेषण करने की दीठ रखते हैं। अंग्रेजी तो ‘लाट साहब’ से भी तगड़ी है। फिलहाल प्राध्यापक है। सरकारी खजाने में सीर है। रेगिस्तानी बच्चों को C फ़ॉर Camel के साथ C फ़ॉर Culture से भी रूबरू करवा रहे हैं। यायावर हैं, शौकिया तौर पर लिखते हैं। कमाल के कैमरामैन हैं।
Hemmano India के लिए विशेष आर्टिकल सीरीज ‘थार के रंग‘ लिखी है।

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