गाडी : थार के रंग (13): Kanha Sharma
थार के रंग 

गाडी : थार के रंग (14): Kanha Sharma

गाडी


जिस तरह वास्तविक गाड़ियों के ब्रांड है उसी तरह खेल में गाडी यानी गाड़ी के अनेक ब्रांड है। जिनका सम्बंध इनकी मैन्युफैक्चरिंग से है।

चिकनी मिट्टी की, तार की, चप्पल की, सरकंडे की, खाली डब्बों की, लकड़ी की, लोहे की, बेकार हो चुके प्लास्टिक, पॉलीथिन को जलाकर और गत्ते आदि से अनेक तरह से हमारे यहां बालक गाडी बनाते हैं।

अगर और कुछ नहीं तो महज एक पुराना टायर ही उनके लिए बड़ा एडवेंचर हो जाता है और अगर टायर भी न हो तो खुद को ही गाड़ी समझ कर हाथों को हवा में ऐसे फैलाते हैं मानो स्टियरिंग पकड़ रखा हो।

गाडी : थार के रंग (13): Kanha Sharma
Picture by Graham Crouch/UNICEF

तेजी से चलते हैं और बाकी के वी एफ एक्स खुद करके पूरी फील के साथ अपनी गाड़ी चलाते हैं। ढर्रर… ढ़च ढ़च…! करके अपने पसंदीदा गाड़ी के इंजिन की साउंड खुद क्रिएट करते हैं।

इतना ही नहीं दनदनाते हुए आसपास के ऑब्जेक्ट्स के बिल्कुल करीब से क्लोज ओवरटेक करते हैं। पों पों… टीं टीं… हुल हुल… करके विभिन्न प्रकार के हॉर्न बजाते हैं। जगह नहीं मिलने पर अपनी नराजगी जाहिर करते हैं और तो और चररर चररर…. कररर कररर साउंड कर के गियर बदलने की आवाजें भी आती है।

गाडी : थार के रंग (13): Kanha Sharma

बालक थकहार कर ऐसा तब करते हैं जब बाजार के खिलौनो हेतु मिन्नते, रुदन, जिद्द और काम करने के बाद भी उन्हें अपने माता पिता के द्वारा कोई भी खिलौना खरीद पाने की अक्षमता और बालकों की निरंतर जिद्द स्व तंग आकर उन्हें थपड़ा दिया जाता है।

कम संसाधनों और बड़े सपनों की भिड़ंत से उड़ते अभिलाषाओं के परखच्चों के मलबे से निकलकर पांच मिनट पहले घोर निराशा में बैठा बालक इस गाडी को जब बनाकर तैयार करता है तो बिल्कुल उसी तरह रिएक्ट करता है मानों अभी अभी शोरूम से अपनी ब्रांड न्यू चमचमाती कार लेकर निकल हो।

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गाय, बकरी, भेड़, भैंस आदि को चराते चराते अपनी परिकल्पना में गाड़ी पर बैठा बालक एक दिन में कई किलोमीटर बड़े जोश और जुनून के साथ पैदल चल लेता है।

गाडी मुझे इसलिए भी अच्छी लगती हैं क्योंकि ड्राइविंग और बाइक राइडिंग मेरा फेवरिट स्पोर्ट है और कभी कभी जब इन बच्चों को देखता हूँ तो मुझे इनसे जलन होने लगती है, क्योंकि मुझे ड्राइविंग या राइडिंग के लिए सही गाड़ी/बाइक, सही ट्रैक, सही समय और सही गति का नियोजन करना पड़ता है जबकि ये बच्चे हर दिन अपने मनपसंद ट्रैक पर मनपसंद समय पर मनपसन्द गाड़ी से मनपसन्द सफर का आनंद लेते हैं।


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(प्रकाशित आलेख में व्यक्त विचार, राय लेखक के निजी हैं। लेखक के विचारों, राय से hemmano.com का कोई सम्बन्ध नहीं है। कोई भी व्याकरण संबंधी त्रुटियां या चूक लेखक की है, hemmano.com इसके लिए किसी तरह से भी जिम्मेदार नहीं है।)

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कान्हा शर्मा

रेत के समंदर में पले-बढ़े कान्हा शर्मा खुद को ‘थारिस्ट’ कहते हैं। थार के रीति-रिवाजों, परंपराओं का बारीक विश्लेषण करने की दीठ रखते हैं। अंग्रेजी तो ‘लाट साहब’ से भी तगड़ी है। फिलहाल प्राध्यापक है। सरकारी खजाने में सीर है। रेगिस्तानी बच्चों को C फ़ॉर Camel के साथ C फ़ॉर Culture से भी रूबरू करवा रहे हैं। यायावर हैं, शौकिया तौर पर लिखते हैं। कमाल के कैमरामैन हैं।
Hemmano India के लिए विशेष आर्टिकल सीरीज ‘थार के रंग‘ लिखी है।

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