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कोरोना के सम्बन्ध में प्रशासन को 10 सलाह – Hemmano Guest Column

कोरोना के सम्बन्ध में शासन और प्रशासन को 10 सलाह

चूंकि अब कोरोना के मरीज़ तेज़ी से बढ़ रहे हैं। रोगियों की डबलिंग रेट काफी तेज हो गई है। पॉज़िटिव रोगी अब गांवों में भी निकल रहे हैं। ग्रीन ज़ोन कुछ ही दिनों में ऑरेंज में बदल गए हैं। अभी कोरोना के कुल रोगी 62,500 है।
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यदि दुर्भाग्यवश यह संख्या अमेरिका की जनसंख्या के अनुपात में हमारे यहां भी लाखों में चली जाती है तो हम क्या करेंगे? अमेरिका की 32 करोड़ जनसंख्या में 13 लाख कोरोना पॉज़िटिव हैं। उसकी जनसंख्या हमारी जनसंख्या की एक चौथाई है। ऐसे में हमारे यहां 50 लाख के करीब मरीज़ हो जाते हैं, लेकिन अभी तक भाग्य हमारे साथ है। परन्तु अब हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हम एक गरीब और अल्प साधन युक्त देश हैं। हमें कोरोना उपचार का तरीका बदलना चाहिए। हम अमीर देशों की तरह इससे नहीं निपट सकते। हमें अपनी स्थिति देखते हुए उचित कदम उठाना ही चाहिए। मेरी शासन और प्रशासन को यह सलाह है इस संबंध में-
● जिन कोरोना पॉज़िटिव रोगियों में कोई लक्षण नहीं हैं और उनकी आयु 50 से कम है उन्हें घर पर रहकर ही उपचार देना चाहिए। यह सुनिश्चित हो कि उनके घर मे एक अलग कमरा हो जहां वे खुद को आइसोलेशन में रख सकें और बाहर ना निकले। ऐसा करके हम अस्पतालों पर 60 से 70 प्रतिशत भार कम कर देंगे।
● जिन रोगियों को हल्के लक्षण हो लेकिन आयु 40 के अंदर हो उन्हें भी घर पर ही रहने दिया जाए। लेकिन यदि कोई एमरजेंसी हो तो उन्हें तुरंत एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध हो यह सुनिश्चित किया जाए।
● जिन पॉज़िटिव रोगियों की आयु 50 से ज़्यादा हो और लक्षण मामूली हो उन्हें एक सामान्य से अस्पताल में ठीक होने तक भर्ती रखा जाए। अस्पतालों को दो भागों में बांटा जाए- सामान्य और विशेष।
● जिन पॉज़िटिव रोगियों को पहले से कोई जटिल रोग हो जैसे टीबी, अस्थमा, मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर या जिनकी आयु 60 से अधिक हो उन्हें सुपरस्पेशलिटी कोविड सेंटर (विशेष अस्पताल) में रखा जाए । जहां वेंटिलेटर भी हो।
● रोगियों को भर्ती रखने का समय भी कम किया जाए। (जैसा कि निर्णय लिया गया है सरकार द्वारा कल ही कि अब थ्री टियर डिस्चार्ज प्लान फॉलो किया जाएगा)।
● सामुहिक क्वारर्ण्टाइन की जगह होम क्वारर्ण्टाइन को प्राथमिकता देना चाहिए जिससे सरकार पर खर्च कम आए और लोगों में डर भी कम हो। घर पर वे सकारात्मक भी रहेंगे और पोषक आहार भी ले पाएंगे। लोगों का भय भी दूर होगा क्योंकि अधिकांश गरीब और अनपढ़ लोग इस प्रक्रिया से भयभीत हैं।
● कोरोना को कलंक ना माने लोग ऐसे अभियान चलाए जाना चाहिए। इसके लिए फिल्मी और खेल जगत की सेलेब्रिटीज़ की मदद लेना चाहिए।
● देश एक होकर लड़े इस महामारी से ऐसे अभियान भी चलाएं। देश में साम्प्रदायिकता कम करने के विशेष उपाय हो ताकि इस महामारी को आसानी से हराया जा सके।
● राज्य और केंद्र सरकार यह कह चुकी हैं कि लोगों को कोरोना के साथ ही जीना सीखना होगा तो आखिर हम कबसे उन्हें इसकी ट्रेनिंग देना शुरू करेंगे? शायद आज से ही उन्हें इसकी शिक्षा देना शुरू कर देना चाहिए।
युवाल नोआ हरारी की इस बात से मैं भी सहमत हूँ और हम सब को भी हो जाना चाहिए कि, “समस्याओं को हराने के लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हमारे पास कितनी शक्ति है, महत्वपूर्ण तो यह है कि हम उस शक्ति का अपनी अक़्ल से इस्तेमाल करते हैं या नहीं।”
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(प्रकाशित आलेख में व्यक्त विचार, राय लेखक के निजी हैं। लेखक के विचारों, राय से hemmano.com का कोई सम्बन्ध नहीं है। कोई भी व्याकरण संबंधी त्रुटियां या चूक लेखक की है, hemmano.com इसके लिए किसी तरह से भी जिम्मेदार नहीं है।)

 

Hemmano-Articlesडॉ. अबरार मुल्तानी


डॉ. मुल्तानी एक प्रख्यात विशेषज्ञ होने के साथ-साथ स्वास्थ्य लेखन में पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। वे ‘‘इंक्रेडिबल आयुर्वेदा’’ के संस्थापक हैं तथा ‘‘स्माइलिंग हार्ट्स’’ नामक संस्था के प्रेसिडेंट हैं। वे देश के पहले आनंद मंत्रालय की गवर्निंग कमेटी के सदस्य भी रहे हैं। ‘‘बीमार होना भूल जाइए’’ और ‘‘सोचिए और स्वस्थ रहिए’’ बेस्ट सेलर पुस्तकों सहित अब तक 16 पुस्तकें लिख चुकें हैं।

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