भारत और नेपाल के बीच गहराती खाई
समसामयिक

भारत और नेपाल के बीच गहराती खाई

भारत और नेपाल के बीच सीमा पर तनातनी लगातार बढ़ती ही जा रही है, 12 जून को हुई गोलीबारी में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु हो गयी और 2 लोग घायल हो गए. अब नेपाल के एफएम चैनल्स पर भारत विरोधी गाने बज रहे हैं जो कि भारत के उत्तराखंड में भी सुनाई दे रहे हैं. साथ ही साथ नेपाल की संसद एक नया नागरिकता संसोधन कानून लेकर आई है जो भारत-नेपाल के सदियों पुराने रिश्ते में बड़ा बदलाव ला देगा।

भारत और नेपाल के बीच गहराती खाई

इन घटनाओं के बाद पहले से ही दोनों देशों के मध्य संशय की स्थिति और अधिक बढ़ गयी है. सोशल मीडिया पर भारतीय काफी गुस्से में दिख रहे हैं.

एक ट्विटर यूजर श्रीवत्स ने प्रधानमंत्री की कूटनीति पर प्रश्न उठा दिया –

उन्होंने लिखा – मोदी की कूटनीति बड़ी फ्लॉप है।

नेपाल सीमा विवाद शुरू करता है और भारतीयों को गोली मारता है। चीन भारतीय भूभाग पर काबिज है. बांग्लादेश और भारत के बीच CAA के बाद से दरार. श्रीलंका चीन के साथ मजबूती से खड़ा है. कश्मीर में पाक की आतंकवादी गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं. वो सभी विदेश यात्राएं केवल पैसे की बर्बादी थी.

एक अन्य यूजर गौरव सांवत ने लिखा कि – हर युद्ध में,  भारत आजादी के बाद से जीता है जब नेपाल में हमारे भाइयों ने भारत के लिए खून बहाया है- मुझे याद है कि भारतीय प्रधानमन्त्री ने 2014 में नेपाल यात्रा के दौरान ठीक यही बात कही थी.

 (भारत और नेपाल भाई हैं। उनका नेतृत्व चीनी प्रभाव में हो सकता है लेकिन लोग हमारे हैं। हमारी सभ्यता हमें बांधती है।)

अब जानते हैं भारत और नेपाल के बीच इस बढ़ती दरार का कारण-

भारत के उत्तराखंड और नेपाल के सुदूरपश्चिमी प्रान्तों के बीच दोनों देशों की सीमाओं पर विवादित इलाका है. ये इलाका कालापानी नदी की घाटी में फैला हुआ है. यहाँ ऊंचाई पर के दर्रा है जिसे लिपुलेख दर्रा कहते हैं और वहां से उत्तर-पश्चिम की ओर एक और दर्रा है जिसे लिम्पियाधुरा दर्रा कहते हैं.

लिपुलेख से लेकर कालापानी और लिम्पियाधुरा तक पूरा विवादित इलाका है इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के मध्य 1998 से बात चल रही है, लेकिन ये विवाद दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों के मद्देनज़र आज तक कभी भड़का नहीं था.

भारत और नेपाल के बीच गहराती खाई

लेकिन ऐसा क्या हुआ जिससे भारत और नेपाल की सदियों की मित्रता में संदेह के बादल गहराने लगे-

भारत और नेपाल की सांस्कृतिक साम्यता और क्षेत्रीय सामंजस्य सदियों पुराना है इसमें कोई संदेह नहीं है. नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भी भारत के समर्थक माने जाते हैं, लेकिन इस वर्ष नेपाल ने अपना एक आधिकारिक नक्शा जारी किया जिसमें उसने लिपुलेख, लिम्पियाधरा और कालापानी इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया है, जिससे विवाद पनप गया है.

कुछ लोगों का कहना है कि नेपाल चीन की तरह विस्तारवादी नीति अपना रहा है और भारत के साथ विवाद करने के लिए उसे चीन का पूरा सहयोग मिल रहा है. नेपाल में सत्ता की स्थिति काफी संशय में रहती है. नेपाल में सत्ता को लेकर जोड़तोड़ चलती रहती है.

भारत और नेपाल के बीच गहराती खाई

2015 के बाद से अबतक नेपाल में तीन बार सरकार गिर चुकी है, इसीलिए कुछ लोगों का मानना है कि नेपाल के वर्तमान प्रधानमन्त्री अपनी सरकार को बचाने के लिए इस सीमा विवाद को छेड़ रहे हैं ताकि वे राष्ट्रवाद की भावना जगाकर अपनी सरकार बचा सकें.

इतिहास में भारत और नेपाल के सम्बन्ध स्थिर रहे हैं और दोनों देशों के मध्य काफी अच्छे सम्बन्ध रहें है लेकिन हाल ही के वर्षों में नेपाल चीन की तरफ जा रहा है ताकि वो चीन के बाज़ार और संसाधनों का उपयोग कर सके. इसलिए नेपाल चीन के इशारों पर ही भारत के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न कर रहा है.

नेपाल का नागरिकता संशोधन प्रस्ताव –

नेपाल की संसद ने नागरिकता क़ानून में संशोधन को बहुमत से पारित कर दिया है.

नए प्रस्ताव के तहत नेपाली पुरुषों के साथ विवाह करने वाली विदेशी महिलाओं को विवाह के बाद नेपाल की नागरिक बनने के लिए सात साल का इंतज़ार करना पड़ेगा. नेपाली नागरिकता प्राप्त करने के लिए विदेशी महिला को उसकी पुरानी नागरिकता के त्याग का प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ेगा. ये क़ानून भारत सहित सभी विदेशी महिलाओं पर लागू होगा.

भारत और नेपाल के बीच गहराती खाई

इसका सीधा-सीधा असर भारत और नेपाल के सांस्कृतिक रिश्तों पर पड़ेगा. उत्तराखंड और बिहार के नेपाल बॉर्डर पर स्थित अधिकाँश इलाकों में नेपाल में शादियाँ होती हैं और यहाँ का सांस्कृतिक समन्वय रोटी-बेटी का है. अब इस क़ानून के आने के बाद भारतीय अपनी बेटियों को नेपाल में ब्याहने से कतरायेंगे और कानूनी दावपेंचो से बचने की कोशिश करेंगे.

नेपाल के अनुसार ‘’किसी देश की नागरिकता के लिए इंतज़ार करना कोई बुरी बात नहीं है, नागरिकता को थाल में परोसकर नहीं दिया जा सकता है इसे कमाना पड़ता है.

जो भी हो, हम तो चाहते हैं कि नेपाल और भारत के बीच पनपते टकराव को उचित संवाद के माध्यम से सुलझाया जा सके और दोनों देश शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की धारणा को ही सर्वोपरि समझें. दोनों देशों की सरकारों को अपनी विदेश नीति और पडौसी देशों की नीति पर पुनः विचार करने की आवश्यकत है.

इससे पहले की न्यूज़ चैनल पत्रकार अपने माता पिता की इकलौती संतानों चीनी सैनिकों की तरह नेपाल के सैनिकों के परिवार रिकॉर्ड की तरफ जाए. दोनों देशों को संभालना होगा ताकि अपनी सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण इतिहास को भविष्य में भी बरकरार रख सकें.

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