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शिक्षा

करियर काउंसलिंग कैसे? क्या है 10वीं कक्षा का महत्व?

करियर काउंसलिंग और विद्यार्थी


वर्तमान समय में किसी का भी बच्चा बमुश्किल अनपढ़ रहता होगा और जो पढ़ लिख लेता है उसके लिए भविष्य चुनने की समझ विकसित करना भी आवश्यक है।

मेरे मानने में हमारी भारतीय शिक्षा प्रणाली में जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल होता है – दसवीं कक्षा।

हाँ, मेरे अनुभव कम है इसलिए मैंने अपने अल्पज्ञान में ही इस विषय पर चर्चा करने की आवश्यकता समझी है। कृपया ध्यान देवें।

दसवीं कक्षा तक विद्यार्थी multitalented (बहुकौशलवान) होता है क्योंकि वह उस समय तक भाषा, समाज, विज्ञान व गणित पर अपना आधिपत्य रख सकता है और रखता भी है।

दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात सबसे जरूरी फैसला लेना होता है।

यह फैसला इतना जरूरी होता है कि उस समय लिए गए फैसले से सम्पूर्ण जीवन का निर्धारण हो जाता है।

उदाहरण के लिए :- रमेश दसवीं कक्षा तक अच्छा विद्यार्थी था, सब विषय में उसके प्राप्तांक 75 से 80 के मध्य थे, उसकी गणित और हिंदी में बराबर रुचि थी, लेकिन वह अपनी पढ़ाई को व्यावसायिक रूप में पढ़ना चाहता है ताकि शीघ्रता से नौकरी हासिल करके वह अपने घर का उद्धार कर सके। उसके गाँव में कोई करियर काउंसलिंग के लिए उपलब्ध नहीं है जो उसे 11वीं कक्षा में उचित विषय लेने के लिए मार्गदर्शन कर सके।

थक हार कर रमेश आर्ट्स की तरफ झुक जाता है और हिंदी साहित्य, राजनीति व इतिहास को अपना उपविषय बनाता है।

करियर काउंसलिंग कैसे? क्या है 10वीं कक्षा का महत्व?

यहाँ तक रमेश एक विषय को पढ़ रहा है, 11वीं अच्छे अंकों से उत्तीर्ण कर लेता है और 12वीं भी। एक अच्छे सरकारी कॉलेज में उसका एडमिशन हो जाता है। कॉलेज पास करने के बाद उसका लक्ष्य होता है अच्छी नौकरी की तलाश –

पर यह क्या! उसके लिए इतने विकल्प भी मौजूद नहीं है, आर्ट्स के बाद प्रसिद्ध विकल्प हैं – अध्यापन, वकालत या लोकसेवा परीक्षाओं की तैयारी

यह क्या हुआ, रमेश तो यहाँ कभी भी नहीं जाना चाहता था, वह क्यों आया यहाँ, आखिर यह कैसे हुआ।

रमेश पुनः अपने अतीत पर जोर देता है, वह समझता है कि दसवीं कक्षा में आर्ट्स लेने के फैसले ने उसके पूरे जीवन को बदल दिया है। उसे तकनीक में रुचि है पर उसके हाथ में साहित्य की डिग्री है,

वह नैवी, ऐयरफोर्स में जाना चाहता है मगर उसके पास राजनीति विज्ञान में स्नातक है।

वह सॉफ्टवेयर डेवलपर बनना चाहता है, लेकिन कैसे बनेगा, इतिहास में डिग्री लेकर?

एक फैसले से उसके जीवन की कायापलटी जा चुकी है, उसे यह तो मालूम है कि चूक कहाँ हुई, परन्तु असल में चूक क्यों हुई?

करियर काउंसलिंग कैसे? क्या है 10वीं कक्षा का महत्व?

चूक क्यों हुई?

जब विद्यार्थी दसवीं कक्षा पास करता है तो उसे काउंसलिंग की आवश्यकता होती है क्योंकि कोई भी विद्यार्थी स्वनिर्णय से उस समय बहुत कम फैसले ले पाता है जब वह केवल दसवीं पास है। उस विद्यार्थी को सभी क्षेत्रों के भविष्य का मार्गदर्शन देना पड़ता है कि वह भविष्य में कौशल अथवा पैसा में से किसे चुनने का इच्छुक है?

साहित्य, राजनीति के इतिहास जैसे विषय कुशलता के प्रतीक हैं और शीघ्र उच्च स्तरीय नौकरी प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी को इनमें जरा मुश्किल आती है क्योंकि अधिकांश विषय विशेष डिप्लोमा की मांग करते हैं जिनमें कुछ समय और लग जाता है।

क्यों होता है कि विद्यार्थी अपनी रूचि से लाभ भुना नहीं पाता है।

मेरे मायनों, अल्पज्ञान व अनुभव के आधार पर खेल वहीं बदल जाता है जहाँ विद्यार्थी की अन्य विषयों (विज्ञान,गणित व अर्थशास्त्र) से तकरार हो जाती है।

अतः दसवीं के बाद विद्यार्थी को एक आवश्यक काउन्सलिंग की जरूरत होती है जिससे वह स्वयं को जान सके और अपनी रूचियों पर काम कर सके।

उचित मार्गदर्शन के अभाव में भविष्य में कोई भी उचित विकल्प भी नहीं मिलता है और अपने पढ़े पढ़ाए को खराब कर मजबूरन वो विद्यार्थी किसी ऐसे काम पर लग जाता है जिसके लिए उसने पढ़ाई नहीं की थी या उसके स्तर से कम था।
प्रसिद्ध लेखक मानव कॉल की ये पंक्तियाँ सटीक बैठती हैं – “कितनी बड़ी त्रासदी है ये, अपनी क्षमता से कम जीना”

– रूचि नाइक

नृविज्ञान विद्यार्थी, गुवाहाटी विश्वविद्यालय

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