भूले बिसरे खेल : Hemmano Guest Column
संस्कृति

भूले बिसरे खेल : Hemmano Guest Column

भूले बिसरे खेल


आजकल फेसबुक पर एक नए खेल (pubg) की रिकवेस्ट आती रहती है  जिसमें फेसबुक मित्र एक दूसरे को उस खेल में चैलेंज देते हैं और एक के बाद एक लेवल आगे बढ़ते है।

1. पिवड़ी – होली के आस-पास के इस समय को मैरे बचपन के साथ compare करूँ तो होली के आस पास का ये समय होता था सबसे प्रचलित खेल पिवड़ी( वर्तमान हॉकी का देशी वर्जन ) खेलने का। बस आज की हॉकी के लगभग सभी नियम थे बस गोलकीपर को छोड़कर क्योंकि एक तरफ सभी स्ट्राइकर होते थे तो दूसरी तरफ डिफेंडर हर खिलाड़ी all-rounder था।

खेल में खिलाड़ी के हुनर को उतनी तव्वजो नही थी जितना कि उसके गेडिये(hocky stick) की थी। जिसके पास सबसे मजबूत लकड़ी का गेडिया होता था उसको अपनी टीम में लेने में सब प्राथमिकता दिखाते थे। क्योंकि अगर दूसरी टीम के खिलाड़ियों के पास स्टिक ही नही रहेगी तो वो खेलेंगे किस से क्योंकि ये मजबूत गेडिये वाले खिलाड़ी कु-ढब (उल्टी तरफ से/ क्रिकेट की भाषा मे reverse swip ) से मारने पर दूसरे खिलाड़ीयों के गेडिये/कभी कभार टंटे/टखने भी अपने गेडिये से मारकर तोड़ डालते थे। होली तक लगभग टाडा(गुहाड़) में यही खेल जोरों पर रहता था।

2. कुळीयो भाटो– ये खेल भी वर्तमान न्यूज़ीलैंड ओर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय खेल रग्बी से मिलता जुलता था जिसमे रेत की एक दुमड़ी(रेत का ढेर) में एक गोलाकार पत्थर छुपा दिया जाता था और दोनों टीमो के खिलाड़ी उस पत्थर को एक दूसरे से छीनकर गोल पोस्ट की तरफ भागते थे लगभग इसी खेल में भी पिवड़ी की तरह बलिष्ट खिलाड़ियों को अहमियत दी जाती थी क्योंकि एक बार पत्थर हाथ मे आते ही खुले सांड़ की तरह गोल पोस्ट की तरफ भागना होता था विरोधियों को अपनी टक्कर से हटाते हुए।

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3. कां-कूट – मैरे गांव की बस स्टेंड के पास वाली पुरानी उच्च माध्यमिक स्कूल की बिल्डिंग के पास के हनुमान मंदिर की खेजड़ी और बद्रीराम जी शर्मा के घर और हीरा लाल जी सुथार के खेत के बीच स्थित केसर कंवर जी की खेजड़ी इस खेल के प्रमुख स्थानों में से थे।

इस खेल में भी सभी खिलाड़ी पेड़ पर चढ़ जाते और एक छोटी लकड़ी नीचे रहने वाले खिलाड़ी को दे दी जाती थी अब नीचे वाले खिलाड़ी को अपनी बारी निकलने के लिए ऊपर चढ़े किसी खिलाड़ी को हाथ से छूना होता था और ऊपर वाले उस लकड़ी को लेने की फिराक में रहते थे और इसके लिए काफी ऊंचाई से नीचे कूद पड़ते थे। आज के जमाने के लड़के अगर इस खेल को खेले तो रोज एक-आध हड्डी का टूटना तय है।

4. मारदड़ी :- कपड़े से बनी दड़ी (गेंद) जिस पर एक के बाद एक कपड़े की कतरनों की कई तह चढ़ाई जाती थी और इसके बाद कपड़े या सुतली की रस्सी से इस पर बुनाई होती थी जिसे सांका कहते थे,सबसे मजबूत दड़ी बनाने में ओंकार नाथ,आसुनाथ आदि प्रमुख कारीगर थे, लगभग हथगोले के जैसी लगने वाली इस दड़ी चोट में भी हथगोले से कम न थी।

5. अडबली/हरदड़ा :- दो ईंटो के मध्य एक लाठी या लंबी मजबूत लकड़ी रख दी जाती थी और इस पर ऊपर वर्णित दड़ी से मारकर गिराने की प्रतिस्पर्धा होती थी,एक टीम के पूरी तरह आउट होने पर विजेता दूसरी टीम उसी लाठी से टोरे(गेंद को उछाल कर लकड़ी से बेसबॉल की तरह) मारते थे और दूसरी टीम के खिलाड़ी इस गेंद को कैच करने की कोशिश करते थे।

एक बार कैच होने पर दूसरा खिलाड़ी टोरे(shot) मरता था । इस खेल में भी left-handers खिलाड़ियों को तव्वजो दी जाती थी क्योंकि अगर कोई खिलाड़ी अगर केवल बाये हाथ से वो दड़ी कैच कर ले तो पूरी टीम आउट मानी जाती थी और इसके बाद पुनः खेल शुरू होता था।

इन सब खेलो के अलावा गुथा, ईटी-डंडा, लुक मींचणी, गच्चा आदि खेल भी थे जिन्हें पूरे साल में मौसम एवं रुत(निर्धारित वक्त) आने से खेल जाता था जिन्हें बेरुत(बिना समय के) खेलने पर गांव के बुजुर्ग भी डांट पिला देते थे।

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पिछले 10 वर्षों से मैंने किसी को भी और खेल का तो पता नहीं, कां-कूट या गुथा खेलते नही देखा समय के साथ साथ और मोबाइल फोन एव इंटरनेट के कारण इन खेलों के प्रति उदासीनता आ गयी है और परंपरागत खेल विलुप्ति की कगार पर खड़े हैं अगर यूँ ही हम मोबाइल के PUBG या अन्य खेल खेलते रहे तो भविष्य में ये खेल लुप्त हो जाएंगे बस इन खेलों के किस्से सुनाने के लिए आप और मुझ जैसे लोग ही बचेंगे।


(प्रकाशित आलेख में व्यक्त विचार, राय लेखक के निजी हैं। लेखक के विचारों, राय से hemmano.com का कोई सम्बन्ध नहीं है। कोई भी व्याकरण संबंधी त्रुटियां या चूक लेखक की है, hemmano.com इसके लिए किसी तरह से भी जिम्मेदार नहीं है।)

Hemmano-Articles

शशि रंजन सारस्वत

लेखक साहित्यिक रूचि रखते हैं, राजस्थान की संस्कृति के बारे में लिखते हैं।

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