नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 
फिल्मी जगत

नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के ‘श्री कृष्ण’ ?

क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के ‘श्री कृष्ण’  नितीश भारद्वाज 

दूरदर्शन अब जब टीआरपी के रिकॉर्ड तोड़ रहा है और इस पर आने वाले पुराने कार्यक्रम इतने ज्यादा मशहूर हो रहे हैं जितने वे पहले भी नहीं थे तो अकस्मात कुछ प्रश्न हमारे मन में उठ जाते हैं कि जब ये कार्यक्रम टीवी इंडस्ट्री के कुछ बेहतरीन कलाकारों द्वारा अभिनीत ही हैं तो ये कलाकार फिल्म इंडस्ट्री में अपना परचम क्यों नहीं लहरा पाए या उनकी फिल्मों को उतनी प्रसिद्धि क्यों नहीं मिली जितनी उनके टीवी कार्यक्रमों को मिली थी।

आपमें से बहुत ने चाहा होगा कि महाभारत सीरियल के ‘कृष्ण’ नितीश भारद्वाज हिंदी फिल्मों में भी मुख्य अदाकारी करते और आपका मनोरंजन करवाते लेकिन क्या आप उनके द्वारा फिल्म स्क्रीन पर किए जाने वाले रोमांस से सहज थे? शायद नहीं!

नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 

नितीश भारद्वाज का जन्म 2  जून 1963 में हुआ। उन्होंने वेटरनेरी डॉक्टर की पढ़ाई की मगर उनका रुझान अभिनय की तरफ था। वे टेलीविज़न और फिल्म अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, पठकथा लेखक,पशु चिकित्सक और लोकसभा में पूर्व सांसद भी रह चुके है। उन्होंने मराठी थिएटर से अपने करियर का शंखनाद किया था। वे बी आर चोपड़ा की लोकप्रिय टेलीविजन श्रृंखला महाभारत में निभाए गए भगवान् कृष्ण के किरदार से हर घर में जाने जाते है।

साथ ही उन्हें विष्णु पुराण में उनके जीवंत चरित्र चित्रण के लिए जाना जाता है। ‘पितृऋण’ उनकी सर्वप्रथम निर्देशित मराठी फिल्म को दर्शकों और आलोचकों ने काफी पसंद किया था। अब वह पूरी तरह अपना ध्यान पटकथा लेखन, निर्देशन और अच्छे अभिनय केंद्रित किरदारों पर लगा रहे हैं।

नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 

1988 में जब दूरदर्शन पर महाभारत आरम्भ हुआ था तब सभी लोगो के घरों में टेलीविजन नहीं हुआ करता था। जिसके घर टीवी होता था उसके घर पर जैसे महाभारत देखने के लिए जमावड़ा लग जाता था। उन्होंने कृष्ण के किरदार में अपनी जान फूंक दी थी।

नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 

अभी लॉकडाउन के वक़्त पुनः  टीवी पर महाभारत का प्रसारण लोग देख रहे हैं और इस महागाथा का आनंद परिवार संग बैठकर उठा रहे हैं। इससे नितीश भारद्वाज काफी प्रसन्न है। लॉकडाउन के दौरान रामायण और महाभारत जैसे कार्यक्रम फिर से टी. आर. पी. चार्ट्स में हाई रेटिंग के साथ अपनी पकड़ बनाये हुए है।

इस शो ने एक बार फिर टी आर पी के झंडे गाढ़ दिए हैं। इस पर महाभारत के एक अभिनेता ने फ़रमाया कि इस शो को करने के लिए सभी को बहुत परिश्रम करना पड़ा था क्यों कि तत्कालीन जमाने में स्पेशल इफेक्ट्स और VFX जैसी टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं हुआ करती थी।

नितीश भारद्वाज का किरदार लोगो को इतना भा गया था कि लोग श्री कृष्ण के रूप में उनकी आराधना करते थे। प्रत्येक घर में महाभारत धारावाहिक रविवार को देखा जाता था। नितीश जी जहाँ जाते थे उन्हें उनके प्रशंसक श्री कृष्ण कहकर उन्हें पुकारते थे। 27 वर्ष पूर्व महाभारत दूरदर्शन पर प्रारम्भ हुई थी। आज भी दर्शक घरो में  श्रीकृष्ण  के संग अन्य किरदारों का आनंद।

नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 

राजनीति में विफलता – नितीश ने जमशेदपुर और राजगढ़ से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में संसदीय चुनाव लड़ा और 1996 में जमशेदपुर से सदस्य के रूप में लोकसभा में चुने गए। लेकिन 1999 के लोकसभा के चुनाव में हार गए। उसके पश्चात उन्होंने स्वेच्छा से राजनीति से संन्यास ले लिया। बाद में उन्होंने अपनी आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु न्यूज़ रीडर और एनाउंसर की नौकरी की।

उन्हें मध्यप्रदेश की राजनीति में काफी कुछ देखना और झेलना पड़ा। उसके पश्चात उन्होंने राजनीति से किनारा करना बेहतर समझा और फिर अभिनय जगत में वापसी की।

नितीश द्वारा की गयी बॉलीवुड और अन्य फिल्में

उन्होंने कुछ बॉलीवुड फ़िल्में की लेकिन कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी।

  • तृषाग्नि (1989)
  • जन गंधर्वन (1991)
  • संगीत (1992)
  • प्रेम दान (1992)
  • प्रेम शक्ति (1994)
  • खटयाल सासु नाथल सून (1987)
  • पसंत आहे मुलगी (1989)
  • तुझी माझी जामली जोड़ी (1990)
  • नसीबवान (1988)
  • मोहनजोदड़ो (2016)
  • केदारनाथ (2018)

4 वर्ष पहले उन्होंने मोहनजोदड़ो जो आशुतोष गोवारिकर की फिल्म है में अभिनय किया था

नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' Mohenjodaro में नितीश भरद्वाज

और 2018 में केदारनाथ फिल्म में सारा अली खान के पिता की भूमिका निभायी थी।

नितीश भारद्वाज इन दिनों एक क्विज शो भी होस्ट कर रहे थे।

 

नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' केदारनाथ में नितीश भरद्वाज

अभी हाल ही में नितीश ने अपने प्रशंसकों से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग शुरू किया। उनके चाहने वाले इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्विटर पर जुड़े। वे इन दिनों महाभारत से जुड़ी मज़ेदार जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। उनके प्रसिद्ध किरदार की लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

बॉलीवुड में इतने सफल क्यों नहीं हो पाए ‘कृष्ण’  

बॉलीवुड में सफल न हो पाने कारण था माइथोलॉजिकल किरदारों में टाइप कास्ट हो जाना। 1990  का दशक Commercial और Action फिल्मों का ज़माना था। पहले  के ज़माने में कमर्शियल फ़िल्में ज्यादा लोकप्रिय थी, जहां पर लोग नाचने, गाने और एक्शन को ज्यादा पसंद करते थे।

नितीश भारद्वाज जैसे  वरिष्ठ अभिनेता जो पौराणिक और धार्मिक चरित्र निभाने के कारण बहुत लोकप्रिय थे परन्तु कमर्शियल फिल्मो में अलग तरह के चरित्र निभाने में उपयुक्त नहीं हो सके और इसीलिए बॉलीवुड की फिल्मो में उतनी लोकप्रियता नहीं मिल सकी। उनकी अभिनय क्षमताओं के मद्दे नज़र उन्हें बेहतरीन किरदार बॉलीवुड में करने को नहीं मिले।

नितीश भारद्वाज ने वेब सीरीज समान्तर से डिजिटल माध्यम पर डेब्यू किया है। उनके किरदार का नाम सुदर्शन चक्रपाणि है।

कुछ और कलाकर जो धार्मिक कार्यक्रमों से प्रसिद्ध हुए:

 

महाभारत के अर्जुन

Firoz Khan as Arjun : नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 

महाभारत में प्रसिद्ध किरदार अर्जुन को दर्शकों ने बेहद प्यार दिया। इस किरदार को फिरोज खान ने  पूरी ईमानदारी से निभाया था और वे दर्शकों के दिल में उतर गए। उन्होंने महाभारत के पश्चात अपना नाम परिवर्तन कर अर्जुन रख लिया। महाभारत का किरदार करने से पूर्व उन्होंने हिंदी सिनेमा में मंज़िल मंज़िल फिल्म से डेब्यू किया था और उन्होंने हिंदी फिल्मो में अलग अलग किरदार निभाए थे।


 

रामायण के राम लोगो के दिलों में बसे है

Arun Govil As Raam : नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 

रामायण भी महाभारत की तरह अत्यंत लोकप्रिय टेलीविज़न सीरीज है जिसके करोड़ो प्रशंसक हैं। अरुण गोविल ने विक्रम बेताल सीरीज की थी और वह भी काफी मशहूर हुई। उसके पश्चात उन्हें राम के रोल का प्रस्ताव आया। रामायण में राम का किरदार अरुण गोविल ने निभाया था। अरुण गोविल ने हिंदी, भोजपुरी, ओड़िया और तेलगु फिल्मो में काम किया है। लेकिन जो लोकप्रियता उन्हें राम का किरदार करने के बाद मिली वह और किसी से न मिली।

रामायण के पश्चात अरुण गोविल ने लव कुश, कैसे कहूं, बुद्धा, अपराजिता, वो हुए न हमारे और प्यार की कश्ती में जैसे मशहूर टीवी सीरियल्स में कार्य  किया। लोग आज भी जब उनसे मिलते है तो उनके आगे हाथ जोड़ते, पाँव छूते नज़र आते हैं। अरुण गोविल बहुत वर्षों से अभिनय नहीं कर रहे हैं और न ही टीवी पर किसी विशेष धारावाहिक पर नज़र आते हैं। वह अब प्रोडक्शन से जुड़े हैं जो दूरदर्शन के कार्यक्रमों की रचना करते हैं।


 

रामायण की चहेती सीता मैया

Deepika as Sita : नितीश भारद्वाज : क्यों बॉलीवुड में सफल नहीं हो पाए महाभारत के 'श्री कृष्ण' 

दीपिका ने सन 1983 में ‘सुन मेरी लैला’ फिल्म से बॉलीवुड में अपने कदम रखे थे लेकिन बॉलीवुड में उन्हें कोई ख़ास पहचान नहीं मिली।

1987 के प्रसिद्ध टीवी प्रोग्राम रामायण में सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया काफी लोकप्रिय हो गयी थी। आज भी लोग उन्हें सीता के नाम से पुकारते हैं। उन्हें आज भी धार्मिक किरदारों का प्रस्ताव आता है लेकिन वे अब अभिनय में वापस नहीं जाना चाहती है। दीपिका ने बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता था और वह सांसद बनी, परन्तु फिर उन्होंने राजनीति को अलविदा कह दिया।

हालांकि इन सभी कलाकारों ने टीवी में जितनी अपार सफलता प्राप्त की उतनी वे बॉलीवुड के गलियारों में अपना डंका नहीं बजा पाए। लोग उनके किये हुए किरदारों से अपने आपको बाहर नहीं निकाल  पाए। लेकिन यह कहना गलत न होगा कि तीस साल बाद आज वे एक बार फिर से उतने ही मशहूर है जितने तब थे।

लेकिन इनमें से कुछ कलाकारों ने अपने नैतिक ज्ञान का उपयोग करते हुए लोगों के दिलों पर राज किया, कुछने फिल्म इंडस्ट्री में संभावनाएं ढूंढी, संतोषजनक किरदार भी निभाए।

लेकिन उस दशक के कार्यक्रमों में निभाए गए किरदारों की छवि अपने जीवन से कभी उतार नहीं पाए।

Hemmano

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