किताबें क्यों जरुरी है?
प्रश्नोत्तरी 

किताबें क्यों जरुरी है?

किताबें क्यों जरुरी है?


बाकी जानवरों से इंसान क्यों आगे है? क्योंकि इंसान बोलना, पढना और लिखना जानता है और लगातार खुद में सुधार करना जानता है. इंसानी इतिहास में संज्ञानात्मक क्रांति सबसे बड़ी क्रांति थी जिसमें इंसान सोचने समझने और उसे प्रयोगिक दृष्टि से काम करने की शक्ति विकसित की।

किताबें क्यों जरुरी है?

खाद्य और संज्ञानात्मक क्रान्ति के दौरान इंसान ने सबसे पहले आग जलानी सीखी, संग्रहण करना सीखा और धीरे-धीरे बोलना भी सीखा. इंसानी जीवन की यही विशेषता है कि वो अपनी प्रगति को पीढी दर पीढी विरासत में दे सकता है और अपनी पिछली प्रगति से पीछे कभी भी नहीं जाता. समय इन्सान का बलवान रहा। मनुष्य ने अपनी मस्तिष्कीय शक्ति का सदुपयोग करना सीख लिया था। लेकिन सबसे बड़ी जो चीज़ काम आयी वो थी ‘किताब’। किताब ने ही मनुष्य को अपना ज्ञान संचित करना और आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना बताया.

किताबें एक शक्तिशाली साधन के रूप में सामने आई हैं। एक जीव विज्ञान की किताब हमें सिखलाती है कि हमारा दिल कैसे धड़कता है, हमारे हाथ पैर कैसे काम करते हैं, पेड़-पौधे कैसे साँस लेते हैं जिसे जानने में मानवजाति को सदियाँ लग गई थी।

होमर, हेरोडोटस, शेक्सपियर, चाणक्य, अल-बरुनी, मार्क ट्वेन द्वारा लिखी गईं प्राचीन किताबें हमें बताती है कि मनुष्य ने पुराने जमाने में किस प्रकार तरक्की की, कौनसी चीज़ें थीं जो उसने गलत की. किताबों से हम कई ज़िंदगियाँ जी लेते हैं, कई अनछुए पहलुओं से रूबरू हो जाते हैं.

वैज्ञानिक इसाक़ न्यूटन के शब्दों में “अगर आप कभी दूर तक देखना चाहें तो एक ही तरीका है कि महान व्यक्तियों के कंधों पर खड़े हो जायें।“

किताबें पढने से क्या लाभ होते हैं?

आप जब इस लेख को पढ़ रहें हैं तो इस बात के होने के सौ फीसदी चांस हैं कि आपने बचपन में कम से कम ‘अ,आ,इ,ई’ तो सीखा ही होगा. क्या वो लिखना या पढना आप बिना किताब देखे ही सीख गए थे? नहीं ना…

किताबें क्यों जरुरी है?

तो आज हम किताबों को नज़रअंदाज कर ऐसा क्यों मान रहें हैं कि किताबे वक़्त खपाती है. अब जब समय को विज्ञान लगातार बदल रहा है तो किताबों और उनका महत्त्व तो और बढ़ गया है ताकि अब तक हुए प्रयोगों, कार्यों की एक समीक्षा या रिपोर्ट रखी जाए ताकि आने वाली पीढी उन उलझनों में न उलझे, जिनसे वर्तमान पीढी उलझी है और उन उलझनों को पार किया है.

किताबें हमारी मानसिक चेतना को जागृत करती हैं, विभिन्न दृष्टिकोण बनाती हैं और ज्ञान की भूख को बढाती हैं।

यादाश्त बढती है, दिमाग शांत रहता है। हर घटना या परिस्थिति में निर्णय लेने और विश्लेष्ण करने की क्षमता बढ़ जाती है।

इसलिए किताबों को पढना और कुछ न कुछ उनके बारे में लिखना भी बेहद जरूरी है. जो पढ़े लिखे हैं उनके पास एक बहुत ही तगड़ी शक्ति है और वो है कि “वे पढ़े लिखे हैं”|

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